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इन्दिरा एकादशी-Indira Ekadashi

आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी इन्दिरा एकादशी कहलाती है। भटकते हुए पितरों के उद्धार के लिए इंदिरा एकादशी का बहुत महत्व बताया गया है। इस एकादशी का व्रत करने वाले मनुष्य की सात पीढ़ियों तक के पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं स्वयं इस व्रत को करने वाले मनुष्य को भी मोक्ष प्राप्त होता है। इस एकादशी पर भगवान शालिग्राम की पूजा की जाती है।इस दिन शालीग्राम जी पर तुलसी दल अवश्य चढ़ाना चाहिए।

एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है और ऐसा करना पाप के समान होता है।

कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दुसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।

इन्दिरा एकादशी तिथि और मुहूर्त -Indira Ekadashi Date And Time

28 सितंबर 2024, शनिवार
एकादशी तिथि शुरू: 13:16 – 27 सितंबर 2024
एकादशी तिथि समाप्त: 14:51 – 28 सितंबर 2024

इंदिरा एकादशी पूजा विधि-Indira Ekadashi Puja Method

इंदिरा एकादशी श्राद्ध पक्ष की एकादशी है। इसके प्रभाव से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पूजा विधि इस प्रकार है –

  • अन्य एकादशी की तरह इस व्रत के धार्मिक कर्म भी दशमी से शुरू हो जाते हैं। दशमी के दिन घर में पूजा-पाठ करें और दोपहर में नदी में तर्पण की विधि करें।
  •  श्राद्ध की तर्पण विधि के पश्चात ब्राह्मण भोज कराएं और उसके बाद स्वयं भी भोजन ग्रहण करें। याद रखें दशमी पर सूर्यास्त के बाद भोजन न करें।
  •  एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर व्रत का संकल्प लें और स्नान करें।
  •  एकादशी पर पुन: श्राद्ध विधि करें एवं ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इसके बाद गाय, कौए और कुत्ते को भी भोज्य पदार्थ दें।
  •  व्रत के अगले दिन यानि द्वादशी को पूजन के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। इसके बाद परिवार के साथ मिलकर भोजन करें।

इन्दिरा एकादशी कथा-Indira Ekadashi story

पुराण में कहा गया है कि सतयुग में इन्द्रसेन नामक एक राजा था। एक दिन नारदजी उसके यहाँ पधारे और कहने लगे – हे राजन! मैं यमलोक से आ रहा हूँ। वहाँ पर तुम्हारे पिता बड़े दुःखी हैं। तुम उनकी सद्गति के लिए आश्विन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करो। इस व्रत के प्रभाव से तुम्हारे पिताजी को सद्गति प्राप्त होगी।

इन्द्रसेन ने नारदरजी के कहने पर आश्विन कृष्ण एकादशी को व्रत किया। इससे उसके पिता यमलोक की यंत्रणा से मुक्त होकर स्वर्गलोक को चले गये। राजा की देखा देखी अनेक प्रजाजन भी यह व्रत रखने लगे।

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